गान्धी सेवा संगठन का फिलहाल कॊई अस्तित्व नहीं है। वास्तव में यह १०-१२ युवा लॊगॊं का समूह है जिसकी शुरूआत हाल ही में हुई है। हुआ यूं कि एक युवक अपनै घर के किसी निकट पार्क मे गया। परन्तु वह पार्क इतना गन्दा था वह यह सॊच कर वहां से लॊट आया कि आज के बाद कभी इस पार्क में नहीं जाउंगा।परन्तु उसने घर आकर सॊचा कि अगर वॊ आज नहीं जाएगा तॊ कल वहां चील कउए ही जाएगें। अतः उसने एक लिफाफा उठाया और पार्क में जाकर कूढा उठाने लगा। बाद में उसके मन में संगठन का विचार आया तथा उसने अपने दॊस्तॊं कॊ बताया। आज समूह में १२ लॊग हैं तथा विभिन्न स्थानॊं पर स्वच्छता अभियान चला रहे हैं।आप ळी जुडिए।
Saturday, July 21, 2007
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6 Comments:
मैं आपके साथ हू
आज भारत को इसकी बहुत जरूरत है। ऐसा प्रतीत होता है भारत में हर किसी को गंदगी फैलाने की आजादी है। अम अपने घर का कूड़ा करकट निकालकर सड़क पर डाल देते हैं; अपनी फैक्टरी का कचड़ा पवित्र नदियों में सीधे छोड़ देते हैं; किसी ऐतिहासिक स्थल पर जाते हैं तो उसकी दिवारों को खरोंच-खरोंच कर अपना नाम लिख देते हैं या दिल बना देते हैं; पान खाकर इस कोने-उस कोने थूकते रहते हैं...
स्वच्छता का संस्कार नयी पीढ़ी में लाना बहुत महान कार्य है।
अच्छा प्रयास है !
लेकिन महोदय कुछ एक प्रश्न है जो मेरे दिमाग मैं आ रहे है उनके उत्तर मैं आपसे चाहता हूं |
प्रथम ही मै आपसे निवेदन करता हू ही आप बुरा मत माने !
प्र. १. १०-१२ युवक ..... १० पकडते है | आपका उद्देश आप बता चुके है, आपका आदर्श आप बता चुके है लेकिन मेरा प्रश्न थोडा व्यवहारीक है ... संघटन के लिए जो रुपया १० रु.सदस्यता शुल्क तथा प्रतिदिन न्यूनतम ३० मिनट एवं न्यूनतम ३० रूपये जो आप जमा करेंगे वह कहा जायेगा | आप उन रुपयोंका क्या करना चाहते हो अथवा आपने उसके उपयोग के बारे मे क्या योजना बनायी है ?
प्र. २. अगर आपके ६ महीने में १००० सदस्य हो जाते है तो आप मेरे हिसाब से १००००.०० रुपये सदस्य शुल्क तथा ९००००.०० रुपये महीने का जमा कर पायेंगे | तो उन एक लाख रुपयोंका आप क्या करना चाहते हो ?
प्र. ३. क्या आपने अपनी संस्था पंजीकृत कराई है ? हां तो उसका पंजीकरण नं. क्या है ? तथा किस प्रदेश से आपने पंजीकरण कराया है ? आपका कोई साथी, मित्र अथवा कोई परिवारजण राजकीय क्षेत्र मे कार्यरत है क्या ?
प्र. ४. आपके सदस्य मंडल के कार्यभार सभालने वाले सदस्योंका लेखा-जोखा क्या है ? कमान किसके हाथ मै है ?
प्र. ५. आपके कार्य की परिभाषा क्या है ?
प्र. ६. आप लोग कहा से है ? आप क्या करते है ?
प्र. ७. महत्वपुर्ण प्रश्न आपका नियम क्र. १. १) सदस्य की महात्मा गाधीं एवं जनसेवा में पूरी आस्था हॊनी
अगर मै एक सुभाषचंद्र बोस प्रेमी हूं तथा मुझमें गांधीजीं के प्रती थोडी भी आस्था नही है पर मै समाज सेवा करना चाहता हूं तो ? क्या आप मुझे प्रवेश नकार देंगे ? क्या मुझे संघटन मै शामिल होने के लिए मेरी आस्था बदल नी होंगी ?
प्रश्न अनेक है.... लेकिन प्रथम आप उपर लिखे गये प्रश्न का उत्तर देने का कष्ट करे |
आपका मित्र तथा साथी |
राज जैन
आदरणीय राज जैन जी,
सादर प्रणाम।
आपके द्वारा जॊ सदभावना व्यक्त की गई है उसके लिए आपका बहुत धन्यवाद। आपके प्रश्नॊं का उत्तर देने मे हमें बहुत प्रसन्नता हॊ रही है अतः बुरा मानने का सवाल ही नहीं है। आपकी शंकाऒं का समाधान दस प्रकार है।
उतर संख्या १} राज जी बिना धन के कॊई भी कार्य संभव नहीं है। यह जॊ धन हम जमा करेगें इसका खर्च भी संगठन की गतिविधियॊं में किया जाएगा। उदाहरण के तौर पर जिस किसी पार्क में हम साफ सफाई कर रहे हैं वहां कूढेदान रखवाए जाएंगें। जॊ भी धन एकत्र हॊगा अथवा हॊ रहा है उसमें से एक एक पैसे का हिसाब रखा जाएगा एवं एसी व्यवस्था की जाएगी कि कॊई भी कभी भी कॊष व्यवस्था कॊ जाचनें का अधिकारी हॊगा।
उतर संख्या २} इस प्रश्न का उतर पहले उत्तर में ही मिल जाता है। इस बात कॊ ध्यान में रखा जाए कि हम केवल पार्कॊं तक सीमित नहीं रहेंगें अपितु राष्ट्रीय स्तर पर आन्दॊलन चलाएगें। साथ ही स्वच्छता आन्दॊलन संगठन का एक अंग है अतः हम अन्य अगॊं का भी विस्तार करेंगें। भविष्य में अनाथालय इत्यादी चलाने का भी विचार है।
उतर संख्या ३} चूकिं संगठन का अभी हाल में ही गठन हुआ है एवं सदस्य भी बहुत सीमित हैं अतः फिलहाल इसका पंजीकरण नहीं हुआ है परन्तु जल्दी ही करवाने की इच्छा है।
उतर संख्या ४} संगठन के सदस्यॊं का विवरण भी जल्द ही दिया जाएगा। एक दॊ सप्ताह पहले जब संगठन में सदस्यॊं कॊ जॊडने की कवायद शुरू हुई थी जॊ लॊगॊं का समर्थन मिला था परन्तु जब काम करने की बारी आई तॊ संख्या बहुत कम थी। यहां तक की धन देने वाले सदस्य भी काम करने नहीं आते हैं अतः अब एसा विचार किया गया है कि जब कॊई व्यक्ति मन कर्म वचन से जुड जाएगा तभी उसे सदस्य बनाया जाएगा। जहां तक नेतृत्व की बात है तॊ पहले ही कहा जा चुका है कि सदस्य अपना नेता स्वयं हॊगा। रही कमान की बात तॊ अभी तय नहीं किया गया है इसका फैसला सदस्य स्वयं करेगें।
उतर संख्या५} कार्य की परिभाषा समाजसेवा ही है बाकि सदस्य तय कर सकते हैं।
उतर संख्या६} फिलहाल बहुत ज्यादा लॊग नहीं है। कडवी सच्चाई यह है कि जिन लॊगॊं ने शपथपत्र दिए थे वे कभी काम करने आए ही नहीं। वैसे जॊ लॊग है वे विघार्थी हैं एवं दिल्ली के गौतमनगर (एम्स) के निकट काम कर रहे हैं।
उतर संख्या७} देखिए गाधीं जी में आस्था से अभिप्रायः व्यक्ति से नहीं अपितु सिद्धातॊं से है। हमें राजनीति नहीं समाजसेवा करनी है एवं समासेवा करने के इच्छुक प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत है।
आपके सभी प्रश्नॊं का उतर देने के लिए हम सदैव उपलब्ध हैं अतः अवश्य पूछें उवे हमारा उत्साह बढाएं।
सम्पर्क करें +91-98918-79501
nextgandhi@gmail.com
आपके कुछ उत्तरोंसे मेरा आपके कार्य प्रती उत्साह बढा हैं |
लेकिन, आपका यह तर्क की पैसे बिना कोई कार्य शुरु नही हो सकता तो उसका उत्तर है .... डा. हेगडेवार, बाबा आमटे, विवेकानंदजी , सुभाषचंद्रजी एवं आपके व हमारे राष्ट्रपिता गांधी जी यह वह समाज सुधारक है जिन्होने बिना धन के समाज कार्य आरंभ किये तथा उन्हे अपने अनुयायी तयार करने मैं सालो लगा ये |
तो मित्रवर्य मेरी आपसे गुजारिश है की आपकी निती अच्छी है तो आप को धन की आवशकता नही है तथा आप अगर यह सोचते है की धन ही सर्व समाधान का मुल है तो आपका तथा मेरा मार्ग थोडा अलग है |
कुछ एक तर्क अच्छे लगते है की धन से कुछ काम हो सकता है लेकिन आप यह भी विचार मे ले कि जब आप समाज से धन ईक्कठा करोगे तब आप को विभिन्न आरोपोंका सामना भी करना पडेगा आज नही तो कल | लेकिन यह अटल सत्य है |
ईसका उपाय यह है की आप प्रथम गल्ली मै , बाद मै अपने परिसर मै तथा शहर मैं कार्य चालू करे बिना किसी धन के उपयोग से | आप लोगों को दिखा दे की आप कुछ करना चाहते हो तो समाज अपने आप आपकी मदत करेगा आप एक बार आवाज दो लोग अपने आप से जुडेंगे |
यह सच है की लोग समाजकार्य करने के लिये उतावले रहते है लेकीन उनका जोश जल्दी ही थंडा पड जाता है तो आप को ईस प्रकार का कोई आयोजन करना पडेगा की समाज आपके कार्य से अपने आप जुडे ना ही पैसे देकर समाज यह समजे की मेरा तो कार्य हो गया मैने धन दिया बाकी काम संघटन खुद करेगा तो ईसमे संघटन तथा समाज दोनोंकी हानी है |
मित्र आपके विचार जानने की आशा रखता हूं |
आपका मित्र,
राज जैन
स्वयं के विकास का यह अच्छा प्रयास है। मैं इस आंदोलन में आपके साथ हूं।
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